Non Veg Story : हिंदी सेक्स नोन वेज कहानियाँ – चुदाई की कहानी हिंदी में

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Non Veg Story : हिंदी सेक्स नोन वेज कहानियाँ (NonVegStory.com) चुदाई की कहानी हिंदी में…

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हैल्लो दोस्तों, मुझे बहुत समय पहले से ही belyjcatalog.ru पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ने का बहुत शौक था। मैंने अब तक बहुत सारी कहानियों के मज़े भी लिए, क्योंकि मुझे सेक्स करना उससे सम्बन्धित सभी काम करना बहुत अच्छा लगता और आप यह मान ले, उसमें मेरी शुरू से ही बड़ी रूचि रही है, इसलिए आज में अपनी भी एक सच्ची घटना और मेरा सेक्स अनुभव आप लोगों तक लेकर आया हूँ, जिसको मैंने बहुत मन लगाकर लिखकर आप तक पहुंचाया है और अब में पहले अपना परिचय और उसके बाद वो घटना सुनाता हूँ। दोस्तों में गुजरात के राजकोट शहर में रहता हूँ और में 26 साल का हूँ। मेरे लंड की लम्बाई 6 इंच है। दोस्तों आज में आप सभी को जो अपनी कहानी सुनाने जा रहा हूँ, वो मेरी और मेरे कज़िन और उसकी बीवी की है। दोस्तों में इस कहानी में आप सभी लोगों को बताऊंगा कि कैसे मैंने अपने भाई की सेक्सी पत्नी को अपने भाई के साथ मिलकर उसके पूरे बदन पर जैम लगाकर पहले चाटा और उसके बाद मस्त मज़े से चोदा। दोस्तों में उम्मीद करता हूँ कि यह मेरा सेक्स अनुभव आप लोगों को जरुर पसंद आएगा।
दोस्तों यह घटना करीब एक सप्ताह पहले की है, जब मेरे मामा का लड़का जिसका नाम मनीष है, वो और उसकी पत्नी अल्पा मेरे घर पर कुछ दिनों के लिए आए हुए थे और तब मेरे घर के सभी लोग किसी काम से बाहर हमारे गाँव गये हुए थे। फिर रात को हम सभी लोगों ने एक अच्छी होटल में जाकर रात का खाना खाया और फिर उसके बाद हम लोग रात को फिल्म देखने चले गए और रात के करीब 12 बजे के बाद हम फिल्म देखकर अपने घर पर आ गए और फिर घर पर आकर मैंने और मनीष ने बरमूडा और टी-शर्ट पहन लिया और अल्पा ने जालीदार मेक्सी पहनी हुई थी, जिसमें से उसका गोरा गोरा गदराया हुआ बदन चिकनी जांघे दिखाई दे रही थी, जिसकी वजह से मेरा तो लंड उसका वो हॉट सेक्सी बदन देखते ही टाईट होकर उसकी चूत को सलाम करने लगा था। अब मेरी नजर बार बार उसकी छाती गोरे गोलमटोल बूब्स पर जा रही थी, जो आकार में इतने बड़े थे कि वो उसकी ब्रा से भी बाहर निकलने को पागल हुए जा रहे थे और बूब्स का आकार ज्यादा बड़ा होने की वजह से वो उस ब्रा के अंदर पूरी तरह से समा भी नहीं रहे थे और वो सब कुछ देखकर में बड़ा चकित था। फिर में अकेला ही पलंग पर सो गया, क्योंकि उसका आकार छोटा था और मेरे भाई ने ज़मीन पर मेरे पलंग के पास में ही अपना बिस्तर लगा लिया और मनीष का भी बिस्तर उसके पास में लगा हुआ था और वो एक चादर अपने ऊपर डालकर लेटा हुआ था। फिर करीब आधे घंटे के बाद मैंने अपनी चोर नजर से देखा कि मनीष अब जोश में आकर चादर के अंदर से पास में सो रही वो अपनी पत्नी अल्पा के बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाने मसलने लगा था, जिसकी वजह से अल्पा के मुहं से हल्की हल्की आवाजें आ रही थी और उन सिसकियों को सुनकर मेरी नींद खुल गई, लेकिन उसको लगा कि में अब तक सो गया हूँ, इसलिए वो बिना चिंता के अपने काम में लगे रहे। फिर वो कुछ देर बाद अल्पा को किस करने लगा, जिसकी वजह से मेरा लंड तो पूरा तनकर खड़ा हो गया और अब मनीष ने अपनी टी-शर्ट को उतार दिया और फिर उसने चादर के अंदर से ही अल्पा की मेक्सी को भी उठाकर उसके गले तक ऊपर कर दिया। वो सब मुझे उस पतली सी चादर के ऊपर से दिखाई दे रहा था और फिर वो कुछ देर बाहर निकलकर वापस चादर के अंदर घुसकर वो अब नीचे की तरफ जाकर अल्पा की चूत को अपनी जीभ से कुत्ते की तरह चाटने लगा, मुझे जिसकी आवाज़ भी आ रही थी। तभी मैंने देखा कि उनके हिलने की वजह से अल्पा के पीछे से वो चादर थोड़ी सी ऊपर हो गयी और अल्पा की पूरी नंगी गोरी कमर मुझे साफ साफ दिखाई देने लगी और में एकदम चकित होकर देखता रहा। दोस्तों अल्पा की वाह क्या मस्त गोरी गोरी और बड़ी आकार की गांड थी। अब तो मुझसे रहा भी नहीं जा रहा था, इसलिए मैंने अपना एक हाथ पलंग से नीचे लटका दिया। उसके बाद मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके अल्पा की गांड को अपने हाथ से छू दिया और उसको छूकर मेरे पूरे शरीर में करंट सा फैल गया। मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ और उसकी गोरी मुलायम गरम कमर को छूकर बड़ा अच्छा लगा तो मेरी हिम्मत बढ़ गई। अब धीरे धीरे उस पर अपने हाथ को घुमाने लगा, लेकिन तब भी अल्पा ने कुछ भी नहीं बोला और उसकी तरफ से बिल्कुल भी विरोध ना होता हुआ देखकर मेरी हिम्मत अब और भी ज्यादा बढ़ गयी और में अपना पूरा हाथ उसकी गांड पर फेरने लगा। दोस्तों उसकी वाह क्या मस्त मखमल जैसी मुलायम गोलमटोल गांड थी और उसको छूकर मेरा जी तो कर रहा था कि में अभी इसी समय उसको खड़ा करके उसकी पूरी गांड को किस कर लूँ।
फिर में उसकी पूरी कमर पर एक तरफ अपना हाथ फिराने लगा। तभी अचानक से मनीष ने अपना एक हाथ पीछे किया तो मेरा हाथ उसके हाथ से छू गया, जिसकी वजह से अब मनीष को भी पता चल गया कि में सोया नहीं हूँ। फिर मनीष ने चादर के अंदर से ही अल्पा से बहुत धीमी आवाज में कुछ कहा और फिर वो मुझसे कहने लगा कि यश तुम भी हमारे साथ नीचे ही आकर सो जाओ। दोस्तों मुझे तो उसके मुहं से वो बात सुनकर बहुत मज़ा आ गया और फिर अल्पा थोड़ी सी आगे की तरफ सरक गई और में उसके पीछे जाकर लेट गया, लेकिन अब मनीष ने उस चादर को अपने ऊपर से हटा दिया। अब मैंने भी उन दोनों पति पत्नी का इशारा तुरंत समझकर अल्पा को अपने सामने उस हालत में देखकर तुरंत आगे बढ़कर मैंने उसकी पूरी मेक्सी को उतार दिया और मनीष ने भी अपने कपड़े उतार दिए और उन दोनों को बिना कपड़ो के देखकर मैंने भी झट से अपने कपड़े उतार दिए, जिसकी वजह से मेरा 6 इंच लंबा और मोटा लंड देखकर मनीष बोला कि अरे यार तेरा लंड तो बहुत बड़ा है, इससे आज अल्पा को तो बहुत मज़ा आ जाएगा। फिर मैंने कहा कि तुम मुझे एक मौका तो देकर देखो, तुमने कभी ऐसा मज़ा नहीं किया होगा, में तुम्हें आज इतना मज़ा दूँगा और फिर में अल्पा के गोरे कंधे पर किस करने लगा, वाह क्या मस्त मखमल जैसा और मुलायम बदन था। फिर में उसके पूरे बदन पर अपनी जीभ को फेरने लगा और अपने होंठो से उसको चूमने लगा, अल्पा के मुहं से सिसकियों की आवाज़ बाहर निकलने लगी, अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह और उसकी साँसे भी धीरे धीरे तेज़ हो गयी और मनीष उसके बूब्स को चूस रहा था। अब अल्पा सीधी लेट गयी और मनीष ने अपना लंड अल्पा के मुहं में डाल दिया और में उसके पूरे बदन पर किस करने लगा और उसको चूमने, चाटने लगा, सबसे पहले मैंने उसकी नाभि के पास चाटना शुरू किया। दोस्तों उसकी नाभि बहुत गहरी, बड़ी और गोरी थी, उसको देखकर में हमेशा बड़ा चकित होकर उसको छूने की इच्छा अपने मन में रखता था और आज में वो सब पूरा करने जा रहा था। फिर मैंने अपनी जीभ को उसकी नाभि में पूरा अंदर डाल दिया, जिसकी वजह से हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था। उसके बाद में अब धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़कर चूमने, चाटने लगा। दोस्तों ये कहानी आप Sexstorian.com पर पड़ रहे है।
अब मैंने उसकी गोरी उभरी हुई छाती पर पहुंचकर उसके मस्त गोल मुलायम बूब्स को अपनी जीभ से चाटा और तभी अपने एक हाथ से एक बूब्स की निप्पल को पकड़कर मसल रहा था और जोश में आने की वजह से उसके दोनों बूब्स की निप्पल तनकर खड़ी हो चुकी थी। फिर में कुछ देर बाद अब उसके दूसरे बूब्स पर अपनी जीभ को घुमा रहा था और बूब्स को चूस रहा था। फिर जीभ को घुमाने के बाद में अब उसकी निप्पल को अपने मुहं में लेकर चाटने लगा। तभी मनीष ने मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया और वो मेरे लंड को धीरे धीरे सहलाने लगा, उसके साथ साथ मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था। अब मैंने अल्पा की बिल्कुल साफ बिना बालों वाली चूत पर में अपनी जीभ को फेरने लगा और उसकी पूरी गरम गीली चूत को में अपना मुहं उस पर रखकर चाटने लगा और कुछ देर बाद अपनी जीभ को उसकी चूत में डालकर अंदर बाहर करने लगा, जिसकी वजह से अब तो अल्पा और भी जोश में आकर आवाज़ निकाल रही थी वो अहह्ह्ह उईईईईइ माँ मर गई और अब मनीष मेरा लंड अपने मुहं में लेकर चूसने लगी और अपनी जीभ से पूरे लंड को ऊपर से नीचे तक चाटने लगा और उसने मेरे पूरे लंड पर अपना थूक लगाकर उसको पूरा गीला कर दिया और फिर अपने मुहं के अंदर बाहर करने लगा। अब में उठकर रसोई में जाकर जैम की बोतल लेकर आ गया और मैंने अल्पा के बूब्स पर बहुत सारा जैम लगा दिया और उसके बाद मैंने उसकी चूत पर भी बहुत सारा जैम लगा दिया और अब मैंने देखा कि बूब्स पर लगे जैम को मनीष अब अपनी जीभ से कुत्ते की तरह चाटने लगा और में उसकी चूत के ऊपर लगे जैम के मज़े अपनी जीभ से चाट चाटकर लेने लगा था।
दोस्तों हमारे ऐसा करने से अल्पा को तो बहुत मज़ा आ रहा था और वो जोश में आकर सिसकियाँ लेते हुए कहने लगी थी, अहह्ह्ह्ह हाँ उफफ्फ्फ्फ़ और ज़ोर लगाओ, हाँ ऐसे ही चाटते रहो, वाह मज़ा आ गया तुम बहुत अच्छा कर रहे हो। फिर मैंने कुछ देर चूसने के बाद वो जैम की बोतल अल्पा के हाथ में पकड़ा दी, तो अल्पा अब अपने गोरे गदराए बदन पर जहाँ भी वो जैम लगाती, हम दोनों उसको चूसने लगते, वो लगती गई और हम दोनों चाटते चले गए। कुछ देर बाद उसने अपनी जाँघ पर जैम लगाया, उसके बाद अपनी निप्पल पर भी जैम लगाया। उसके बाद अपनी नाभि पर भी जैम लगाया और फिर उसने गांड पर जैम लगाया। अब हम दोनों तो पागल कुत्तो की तरह जहाँ वो लगाती, उसको चाटने लगते और इस तरह से हमने उसके पूरे बदन को अपनी जीभ से चाट लिया था। अब मनीष ने मेरे लंड पर भी जैम लगाया और वो खुद ही मेरे लंड को चाटने लगी और फिर उसने अपने लंड पर भी जैम लगाया, तो अल्पा उसका लंड चाटने लगी और फिर उसने दूसरी बार अपने लंड पर जैम लगाया और मनीष ने अपना लंड मेरे मुहं में दे दिया। अब में भी उसका लंड चूसने लगा और अब मेरा लंड अल्पा चूस रही थी और में मनीष का लंड चूस रहा था, उसी के साथ में अपनी एक उंगली अल्पा की चूत में डालकर अंदर बाहर कर रहा था। फिर कुछ देर बाद मेरे ऊपर अल्पा चड़ गयी और उसने मेरा लंड अपने एक हाथ में पकड़कर अपनी चूत में डाल दिया। लंड एक ही बार में पूरा का पूरा अंदर चला गया और अब वो मेरे हाथ का सहारा लेकर लंड पर ऊपर नीचे होने लगी थी, मुझे उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर होते हुए साफ साफ नजर आ रहा था। फिर उसने कुछ देर बाद अपनी गांड को थोड़ा सा बाहर निकला तो मनीष ने उसका इशारा समझकर तुरंत अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया। अब में अपनी तरफ से उसको ज़ोर ज़ोर से धक्के देने लगा और अल्पा हम दोनों के लंड अपनी गांड, चूत में लेकर हमारे धक्को के मज़े लेकर अपने मुहं से आवाज़ निकाल रही थी, उईईईईईइ आह्ह्ह्ह माँ अब बस करो, वरना मेरी फट जाएगी, अहहह्ह्ह।
अब वो हम दोनों के लगातार धक्को की वजह से ज्यादा जोश में आकर मेरे ऊपर सीधी चड़ गयी और मैंने अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। तभी मनीष ने अपने लंड को उसकी गांड से बाहर निकालकर उस पर बहुत सारा तेल लगा लिया, जिसकी वजह से उसका लंड एकदम चिकना हो गया और अब उसने भी अपने लंड को अल्पा की चूत में जबरदस्ती अंदर डाल दिया, लेकिन पहले सिर्फ़ उसके लंड का टोपा ही अंदर गया और फिर उसने ज़ोर से धक्का लगाया, तब जाकर पूरा लंड चूत के अंदर चला गया और दर्द की वजह से अल्पा के मुहं से बहुत ज़ोर से चीखने की आवाज़ निकल गई, ऊउईईईईइ माँ में मर गई, आईईईई उफ्फ्फफ्फ्फ़ यह तुम दोनों ने क्या किया आह्ह्ह्ह मेरी चूत फट गयी, प्लीज अब बाहर निकालो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन अब हम दोनों अल्पा के दर्द की चिंता किए बिना उसकी एक ही चूत में अपना लंड डालकर अंदर बाहर करने लगे और थोड़ी देर धक्के देने के बाद मनीष ने अपना वीर्य अल्पा की चूत में ही निकाल दिया और उसके बाद उसने अपने लंड को भी दो चार धक्के देने के बाद चूत से बाहर निकाल लिया। अब में अल्पा के ऊपर चड़ गया और में उसको अपनी तरफ से ज़ोर ज़ोर से धक्के देने लगा। तब मैंने कुछ देर बाद महसूस किया कि अब अल्पा भी झड़ गई थी, उसकी चूत से चूत रस निकलने के साथ साथ वो धीरे धीरे शांत और ढीली होती चली गई। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और अल्पा के मुहं में डाल दिया, तो वो मेरा लंड बड़े मज़े से चूसने लगी और मैंने भी कुछ देर उसके मुहं में धक्के देने के बाद अपना वीर्य उसके मुहं में ही निकाल दिया, जिसको अल्पा ने अपनी जीभ से चाट चाटकर चूसकर पूरा साफ कर दिया। उसके बाद हम तीनों ही थक हारकर एक एक करके वैसी ही हालत में गहरी नींद में सो गए।
दोस्तों सुबह मनीष और अल्पा ने बहुत खुश होकर मुझसे कहा कि यार कल रात जैसा मज़ा तो हमें हमारे अब तक के किसी भी खेल में कभी नहीं आया, तुम बहुत मस्त मज़े से सारे काम करते हो और तुम्हें इस खेल में बहुत कुछ आता है, तुम बहुत अनुभवी हो और फिर उसने कहा कि अब कभी जब भी तुम्हें मौका मिले तो हम लोग दोबारा मज़ा लेंगे और मैंने भी उनको अपनी तरफ से हाँ कहा ।।

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